Aman Mokhade बन गया विदर्भ का सुपरस्टार, रणजी और विजय हजारे में मचा रहा धमाल
मैदान पर शांत दिखने वाले Aman Mokhade ने अपने आप से बातें करते-करते बना डाले 1000 से ज्यादा रन. स्टैंड्स से देखने पर Aman Mokhade एकदम शांत और संयमित बल्लेबाज नजर आते हैं। पुरानी स्टाइल की बैटिंग, कोई जल्दबाजी नहीं, बल्ला मजबूती से पकड़े और आंखें एकदम स्थिर होती है। कुछ इस दिन में अमन मोखंडे कमाल कर रहे है।

ये निजी तूफान शायद पिछले सीजन के लंबे इंतजार से पैदा हुआ है। Aman Mokhade अच्छी तरह जानते हैं कि छाया में रहने का क्या मतलब होता है। पिछले सीजन का ज्यादातर समय उन्होंने विदर्भ की टीम के किनारे पर बिताया। यश राठौड़ और दानेश मलेवार ने अपनी जगह पक्की कर ली थी, इसलिए मोकाड़े के लिए मौके बेहद कम थे।
चाहे लाल गेंद हो या सफेद, Aman Mokhade ने एकदम साफ इरादे और मजबूत मानसिकता के साथ बैटिंग की है। रणजी ट्रॉफी की पांच मैचों में उन्होंने 577 रन ठोके हैं, जिनकी औसत 96.16 है – ये आंकड़ा किसी भी बल्लेबाज के लिए शानदार माना जाता है। वो इस टूर्नामेंट के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ियों में शामिल हैं।
ये लय विजय हजारे ट्रॉफी में भी बरकरार रही। पांच मैचों में उन्होंने 487 रन बनाए हैं जिनकी औसत 121.75 है , और 53 चौके, 13 छक्के मारे , और तीन शतक भी लगाए हैं। शनिवार को बड़ौदा के खिलाफ उनका शानदार नाबाद 150 रनों की पारी ने तो उनके दबदबे को साबित कर दिया। कोई चमक-दमक वाली बैटिंग नहीं करते Aman Mokhade। उनका खेल पारंपरिक है, और सेलिब्रेशन भी ज्यादा दिखाने वाला नहीं सब कुछ संयमित।
नागपुर से मुंबई तक का Aman Mokhade का सफर
Aman Mokhade का क्रिकेट सफर प्रवीण हिंगनीकर क्रिकेट अकादमी से शुरू हुआ था। फिर पांच साल पहले वो नागपुर क्रिकेट अकादमी चले गए, जहां उनकी जिद्दी और दृढ़ निश्चयी होने की ख्याति बढ़ती गई। हाल ही में, इस भूख ने उन्हें मुंबई तक ले गया। वहां उन्होंने कुछ प्रैक्टिस सेशन किए, जिसमें घरेलू क्रिकेट के महारथी वसीम जाफर के साथ लंबी बातचीत भी शामिल थी। फोकस एकदम स्पष्ट था। कोच बताते हैं, “उन्होंने अपने पुल शॉट पर खूब काम किया, जो पहले उनकी कमजोरी हुआ करता था। वो इसे बार-बार प्रैक्टिस करते, खुद से बातें करते, छोटी-छोटी डिटेल्स सुधारते रहते।”
अगर Aman Mokhade इसी तरह परफॉर्म करते रहे, तो विदर्भ उन्हें अपनी रणजी और विजय हजारे अभियान में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में देखेगी। पिछले सीजन जो खिलाड़ी बेंच पर बैठा रहता था, आज वही टीम की रीढ़ बन रहा है। विदर्भ की टीम मैनेजमेंट अब उनके नाम पर भरोसा करती है। जब मुश्किल परिस्थिति आती है, तो मोखाड़े का नाम सबसे पहले दिमाग में आता है। उनकी शांत और संयमित बैटिंग टीम को स्थिरता देती है।
Aman Mokhade की सफलता का राज उनकी मेहनत और आत्म-सुधार में छिपा है। जहां कई खिलाड़ी असफलता के बाद हार मान लेते हैं, वहीं मोखाड़े ने हर असफलता को सीख में बदला। पिछले सीजन की कुंठा को उन्होंने अपनी प्रेरणा बनाया। उनकी बैटिंग में कोई फैंसी स्ट्रोक्स नहीं हैं, लेकिन हर स्ट्रोक सोच-समझकर खेला जाता है। वो जानते हैं कि कौन सी गेंद पर कौन सा शॉट खेलना है। धैर्य उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मोखाड़े इसी तरह का फॉर्म बनाए रखते हैं, तो जल्द ही वो राष्ट्रीय टीम के चयनकर्ताओं के रडार पर आ सकते हैं। घरेलू क्रिकेट में लगातार परफॉर्मेंस भारतीय टीम में जगह बनाने का सबसे पक्का रास्ता है।
विदर्भ क्रिकेट के लिए उम्मीद की किरण
विदर्भ क्रिकेट, जो पहले से ही रणजी ट्रॉफी में मजबूत टीम मानी जाती है, को मोखाड़े जैसे युवा खिलाड़ी में एक नया हथियार मिल गया है। यश राठौड़ और दानेश मलेवार के साथ-साथ अब मोखाड़े भी टीम की बैटिंग लाइनअप को मजबूती देते हैं। विदर्भ की टीम अब उम्मीद कर रही है कि मोखाड़े खुद से बातें करते रहें – और अपने बैट को और जोर से बोलने दें। जब खिलाड़ी अपने आप से सख्त होता है, तो परिणाम मैदान पर दिखते हैं। मोखाड़े इसका जीता-जागता सबूत हैं।
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इस सीजन उनका परफॉर्मेंस साबित करता है कि धैर्य, मेहनत और आत्म-सुधार की भावना से कोई भी अपने सपने पूरे कर सकता है। पिछले साल जो खिलाड़ी बेंच पर बैठा था, आज वही अपनी टीम का स्टार बन चुका है। अब देखना ये है कि मोखाड़े इस फॉर्म को कितने समय तक बनाए रख पाते हैं। लेकिन उनकी मानसिकता और काम करने के तरीके को देखते हुए, ये कहा जा सकता है कि ये सिर्फ शुरुआत है। अभी बहुत कुछ बाकी है इस खुद से बातें करने वाले बल्लेबाज के पास।

