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Bharat Taxi : अमित शाह का बड़ा एलान: टैक्सी ड्राइवरों को अब मिलेगा 80% कमाई, ‘भारत टैक्सी’ बदल देगी कैब इंडस्ट्री का खेल

आप जब भी ऑनलाइन टैक्सी बुक करते हैं, तो क्या आप जानते हैं कि ड्राइवर को कितना पैसा मिलता है? शायद नहीं। दरअसल, आजकल की टैक्सी कंपनियां ड्राइवरों से 25-30 प्रतिशत तक कमीशन काट लेती हैं। मतलब अगर आप 100 रुपये का सफर देते हैं, तो ड्राइवर को मुश्किल से 70-75 रुपये मिलते हैं। बाकी सब कुछ कंपनी की जेब में चला जाता है।

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Bharat Taxi amit shah ( credit- instagram)

लेकिन अब बदलाव आने वाला है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एक ऐसी टैक्सी सेवा का एलान किया है जो ड्राइवरों के साथ पूरी तरह अलग सलूक करेगी। इसका नाम है ‘भारत टैक्सी’ और यह एक सहकारी मॉडल पर काम करती है। इस सेवा में ड्राइवरों को 80 प्रतिशत कमाई मिलेगी। हाँ, आपने सही सुना – 80 प्रतिशत!

अमित शाह ने भारत टैक्सी पर क्या-क्या कहा?

गत सोमवार को दिल्ली में एक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया जहां शाह ने भारत टैक्सी के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने साफ-साफ कहा कि निजी टैक्सी कंपनियों ने ड्राइवरों के साथ अन्याय किया है। ये कंपनियां जानबूझकर कोई न्यूनतम आधार किराया तय नहीं करतीं, जिससे ड्राइवरों की कमाई हमेशा अनिश्चित रहती है। कभी ज्यादा काम है, कभी कम। कभी अच्छा पैसा मिलता है, कभी सूखा महीना भी आ जाता है।

शाह ने कहा, “भारत टैक्सी का मकसद सिर्फ मुनाफा कमाना नहीं है। हमारा लक्ष्य तो श्रमिकों को मुनाफे में सीधा भागीदार बनाना है।”

यह एक बिल्कुल नया सोचने का तरीका है। भारत टैक्सी की कुल कमाई का 80 प्रतिशत सीधे ड्राइवरों को दिया जाएगा। बाकी 20 प्रतिशत को सहकारी पूंजी के रूप में रखा जाएगा, जिससे शुरुआती तीन सालों में सेवा का विस्तार और बेहतरी की जा सके। और सबसे अच्छी बात यह है कि तीन साल के बाद भी यही अनुपात बना रहेगा!

ड्राइवर अब बन सकते हैं ‘सह-मालिक’

भारत टैक्सी में ड्राइवरों की भूमिका सिर्फ टैक्सी चलाने तक सीमित नहीं है। शाह की योजना के अनुसार, ड्राइवर्स को 500 रुपये का शेयर लेकर इस सेवा के सह-मालिक बन सकते हैं। यानी यह सिर्फ एक नौकरी नहीं रहेगी, बल्कि एक अपना बिजनेस हो जाएगा।

और तो और, भविष्य में कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में भी ड्राइवरों के प्रतिनिधियों के लिए जगह रहेगी। मतलब नीति-निर्माण में भी ड्राइवरों की सीधी आवाज रहेगी। यह तो एक पूरा आंदोलन है, सिर्फ एक सेवा नहीं!

भारत टैक्सी का सबसे महत्वपूर्ण फीचर है ‘न्यूनतम आधार किराया’। इसका मतलब है कि किराये की गणना करते समय वाहन की लागत, ईंधन खर्च और ड्राइवर के न्यूनतम लाभ को ध्यान में रखा जाएगा। इससे नीचे कोई भी ऑपरेशन नहीं होगा। यानी ड्राइवर को हमेशा एक निश्चित न्यूनतम कमाई मिल जाएगी।

निजी कंपनियां जहां 25-30 प्रतिशत कमीशन लेती हैं, भारत टैक्सी कोई कमीशन नहीं लेगी। यह बस अपना काम करेगी और ड्राइवरों को उनके हिस्से का पैसा दे देगी।

महिला चालकों के लिए खास सुविधा

महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए, भारत टैक्सी में ‘सारथी दीदी’ फीचर लॉन्च किया जा रहा है। इसके तहत अगर कोई अकेली महिला यात्री को चाहिए, तो वह महिला चालक को प्राथमिकता दे सकती है। यह महिलाओं की सुरक्षा और महिला ड्राइवरों के लिए नई नौकरियों दोनों के लिए अच्छा है।

फिलहाल भारत टैक्सी दिल्ली-एनसीआर और गुजरात के राजकोट में काम कर रही है। लेकिन सरकार के महत्वाकांक्षी लक्ष्य हैं। अगले दो सालों में 15 करोड़ ड्राइवरों को जोड़ना और तीन सालों के भीतर देश के सभी नगर निगम वाले शहरों में सेवा शुरू करना। यह एक विशाल योजना है!

भारत टैक्सी का आमूल जैसा लक्ष

शाह ने सहकारिता के सफलतम उदाहरण के तौर पर अमूल का जिक्र किया। अमूल ने कैसे दूध के उत्पादकों को अपने ही लाभ में हिस्सेदार बनाया, उसी मॉडल पर भारत टैक्सी गतिशीलता यानी मोबिलिटी सेक्टर में काम करेगी। अमूल का यह मॉडल इतना कामयाब रहा है कि आज यह दुनिया भर में सहकारिता का प्रतीक बन गया है।

भारत टैक्सी सिर्फ पैसे देने तक सीमित नहीं है। ड्राइवरों की शिकायतों का समाधान करने के लिए तीन-स्तरीय सिस्टम है:

  • ऑनलाइन शिकायत
  • कॉल सेंटर
  • व्यक्तिगत संपर्क

साथ ही, सभी नीति में बदलाव की जानकारी पहले से ऐप के जरिये दी जाएगी। सहकारी बैंकों के माध्यम से वाहन खरीदने के लिए आसान लोन और बीमा सुविधा भी मिलेगी।

‘ड्राइवर’ नहीं, ‘सारथी’ कहलाना है सम्मान की बात

शाह ने एक बहुत ही खूबसूरत बात कही। उन्होंने ड्राइवरों से अपील की कि वे अपने को ‘ड्राइवर’ की जगह ‘सारथी’ कहलाना पसंद करें। क्योंकि महाभारत में सारथी का मतलब सिर्फ गाड़ी चलाने वाला नहीं होता। सारथी तो योद्धा की तरह सम्मानित होता है। यह भाषा का बदलाव भी एक मानसिक बदलाव है। शाह ने कहा, “भारत टैक्सी का असली लक्ष्य सिर्फ बाजार में जीतना नहीं है। हमारा मकसद तो श्रम की गरिमा को स्थापित करना है।”

दरअसल, भारत टैक्सी एक छोटी सेवा नहीं है। यह एक बड़े सामाजिक आंदोलन का हिस्सा है। यह दिखाता है कि मुनाफा कमाना और श्रमिकों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करना एक दूसरे के विरुद्ध नहीं हैं। आप दोनों कर सकते हैं। अगले कुछ सालों में देखते हैं कि यह योजना कैसे आकार लेती है और लाखों ड्राइवरों के जीवन में कैसे बदलाव लाती है।

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