CBSE का बड़ा फैसला! अब कॉपी जांच होगी डिजिटल—10वीं-12वीं के रिजल्ट भी आ सकते हैं जल्दी!
भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों के मूल्यांकन को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। यह बदलाव सिर्फ एक तकनीकी अपडेट नहीं, बल्कि आने वाले समय में छात्रों, शिक्षकों और पूरे सिस्टम के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।
भागलपुर से शुरू हुआ डिजिटल मूल्यांकन
सोमवार से 12वीं बोर्ड परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन भागलपुर के विभिन्न CBSE स्कूलों में शुरू हो गया है। इस बार खास बात यह है कि कॉपियों की जांच पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि डिजिटल ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के जरिए की जा रही है।
सीबीएसई के सिटी को-ऑर्डिनेटर सुमंत कुमार के अनुसार, 10वीं और 12वीं दोनों कक्षाओं की कॉपियों की जांच की प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो चुकी है। फिलहाल पहले चरण में 12वीं के गणित विषय की कॉपियों का मूल्यांकन किया जा रहा है।
कैसे काम करता है यह नया डिजिटल सिस्टम?
इस नई डिजिटल प्रणाली में छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं के हर पन्ने को पहले स्कैन किया जाता है। इसके बाद इन स्कैन की गई इमेज को सुरक्षित सर्वर के माध्यम से निर्धारित मूल्यांकन केंद्रों पर भेजा जाता है। परीक्षक अब कॉपी को कंप्यूटर स्क्रीन पर देखते हैं और लाल या नीली पेन की जगह माउस की मदद से सीधे स्क्रीन पर अंक दर्ज करते हैं। इससे पूरी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और तेज बनती है।
फिलहाल CBSE तरफ से 10वीं कक्षा की कॉपियों की जांच पुराने यानी मैनुअल तरीके से ही की जा रही है, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि अगले सत्र से 10वीं की कॉपियों का मूल्यांकन भी ऑनलाइन शुरू हो सकता है। इसके लिए CBSE जल्द ही आधिकारिक अधिसूचना जारी कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा डिजिटल बदलाव होगा।
होली के अवकाश के कारण फिलहाल मूल्यांकन कार्य की रफ्तार थोड़ी धीमी है, लेकिन छुट्टियों के बाद गुरुवार से इसमें तेजी आने की उम्मीद है। 12वीं के गणित के बाद अन्य विषयों की कॉपियों की जांच भी शुरू होगी, वहीं 10वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की आपूर्ति भी तेज कर दी जाएगी, जिससे पूरी प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।
क्या होंगे CBSE के इस डिजिटल सिस्टम के फायदे?
इस डिजिटल सिस्टम से कई फायदे सामने आने की उम्मीद है। सबसे बड़ा फायदा पारदर्शिता और सटीकता में सुधार का है, क्योंकि डिजिटल माध्यम में मानवीय गलतियों की संभावना कम हो जाती है। इसके अलावा कॉपियों को एक जगह से दूसरी जगह भेजने में लगने वाला समय और खर्च भी कम होगा। डिजिटल ट्रैकिंग से हर कॉपी की निगरानी आसान होगी और मॉडरेशन प्रक्रिया भी ज्यादा व्यवस्थित तरीके से हो सकेगी।
स्कूलों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से रिजल्ट घोषित करने में होने वाली देरी भी कम हो सकती है। साथ ही, डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहने के कारण भविष्य में री-चेकिंग या पुनर्मूल्यांकन से जुड़े मामलों में भी आसानी होगी। इससे छात्रों और अभिभावकों दोनों को राहत मिल सकती है।
कुल मिलाकर, CBSE का यह कदम शिक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। अगर 12वीं के बाद 10वीं की कॉपियों का भी सफलतापूर्वक ऑनलाइन मूल्यांकन शुरू हो जाता है, तो यह देशभर में बोर्ड परीक्षाओं की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल सकता है। छात्रों के लिए इसका मतलब होगा—कम तनाव, ज्यादा पारदर्शिता और शायद पहले से भी जल्दी आने वाले रिजल्ट।
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