कौन है Gautami Naik? गली क्रिकेट से WPL तक का सफर, कहानी सुनकर आंखें हो जाएंगी नम, जानिए कैसे बदली इस लड़की की किस्मत!

महिला क्रिकेट में आज एक नया सितारा चमक रहा है और उसका नाम है Gautami Naik। महाराष्ट्र की इस 27 साल की बेटी की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। गली में रबर की गेंद से खेलने वाली लड़की आज महिला प्रीमियर लीग (WPL) में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) की जर्सी पहनकर मैदान पर उतर रही है। ये सफर आसान बिल्कुल नहीं था, लेकिन गौतमी ने हार नहीं मानी और अपने सपनों को हकीकत में बदल दिया।

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Gautami Naik wpl (source- instagram)

Gautami Naik की कहानी शुरू होती है उन्हीं गलियों से जहां हर भारतीय बच्चे का क्रिकेट से प्यार शुरू होता है। पड़ोस के लड़कों के साथ गली क्रिकेट खेलना, रबर की गेंद से चौके-छक्के लगाना यही था गौतमी का पहला क्रिकेट स्कूल। उस वक्त किसे पता था कि ये छोटी सी लड़की एक दिन देश की टॉप क्रिकेट लीग में खेलेगी?

करीब 10-12 साल पहले Gautami Naik की जिंदगी में एक अहम मोड़ आया। एक लोकल मैच के दौरान कोच अविनाश शिंदे की नजर इस प्रतिभाशाली लड़की पर पड़ी। उन्होंने गौतमी में वो चिंगारी देखी जो एक महान खिलाड़ी बनने के लिए जरूरी होती है। बस यहीं से शुरू हुआ प्रोफेशनल क्रिकेट का सफर।

Gautami Naik के संघर्ष के दिन

Gautami Naik ने अपने करियर की शुरुआत महाराष्ट्र की U-23 टीम से की। बैटिंग ऑलराउंडर के तौर पर उन्होंने अपनी काबिलियत दिखानी शुरू की, लेकिन सीनियर टीम में जगह बनाना आसान नहीं था। महाराष्ट्र जैसे क्रिकेट के मजबूत राज्य में प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी थी। हर खिलाड़ी अपनी जगह पक्की करने के लिए जी-जान लगा रहा था। और फिर आया COVID-19 का दौर। पूरी दुनिया की तरह क्रिकेट भी थम गया। गौतमी के लिए ये वक्त और भी मुश्किल था क्योंकि उनके मौके और भी कम हो गए। लेकिन असली चैंपियन वही होता है जो मुश्किल वक्त में भी हिम्मत नहीं हारता।

अब Gautami Naik के सामने दो रास्ते थे या तो महाराष्ट्र में मौके का इंतजार करती रहें, या फिर कुछ अलग करने की हिम्मत दिखाएं। गौतमी ने दूसरा रास्ता चुना। अपनी दो साथी खिलाड़ियों किरण नवगिरे और पूनम खेमनार के साथ उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया नागालैंड जाने का।

ये फैसला कितना सही था, ये तो बाद में पता चला। नागालैंड की टीम के लिए गौतमी किसी वरदान से कम नहीं थीं। उन्होंने न सिर्फ टीम की अहम खिलाड़ी के तौर पर अपनी पहचान बनाई, बल्कि नागालैंड को प्लेट ग्रुप से एलीट लेवल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। ये था उनके संघर्ष का असली फल।

Gautami Naik के करियर का सबसे महत्वपूर्ण पल पुणे में एक घरेलू प्रदर्शनी मैच के दौरान आया। इस मैच में गौतमी ने बिल्कुल फ्री होकर, बिना किसी दबाव के अपना खेल दिखाया। और उनकी इसी बैटिंग ने भारतीय क्रिकेट के दिग्गज किरण मोरे का ध्यान खींच लिया। किरण मोरे, जो खुद भारतीय पुरुष टीम के पूर्व विकेटकीपर रह चुके हैं, उन्होंने गौतमी में कुछ खास देखा। उनके समर्थन से गौतमी के लिए नए दरवाजे खुलने लगे। सबसे पहले उन्हें मुंबई इंडियंस के साथ ट्रायल का मौका मिला। और फिर गौतमी का रुख हुआ बड़ौदा की ओर।

बड़ौदा में गौतमी ने वो कर दिखाया जो हर क्रिकेटर का सपना होता है लगातार अच्छा प्रदर्शन। दो शानदार घरेलू सीजन में गौतमी ने साबित कर दिया कि वो सिर्फ एक अच्छी बैटर नहीं हैं, बल्कि एक कंप्लीट ऑलराउंडर हैं। उनकी निरंतरता, परिपक्वता और मैच जिताने की काबिलियत ने सबका ध्यान खींचा। बड़ौदा में उनके शानदार प्रदर्शन ने उन्हें फिर से महाराष्ट्र की टीम में वापसी का रास्ता दिखाया। ये एक तरह से घर वापसी थी, लेकिन इस बार गौतमी एक अलग खिलाड़ी बनकर लौटी थीं ज्यादा मजबूत, ज्यादा आत्मविश्वासी और अनुभवी।

WPL ऑक्शन में RCB ने लगाई बोली

फरवरी 2026 में जब महिला प्रीमियर लीग का ऑक्शन हुआ, तो Gautami Naik और उनके परिवार की आंखें स्क्रीन पर टिकी थीं। और फिर वो पल आया जिसका इंतजार था रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने गौतमी को 10 लाख रुपये में खरीदा। ये सिर्फ पैसों की बात नहीं थी। ये था उन सालों के संघर्ष का इनाम, उन रातों का फल जब परिवार ने आर्थिक तंगी के बावजूद गौतमी की ट्रेनिंग के लिए पैसे जुटाए। उनकी मां, भाई और भाभी सभी की आंखों में खुशी के आंसू थे। ये पल सिर्फ गौतमी का नहीं, बल्कि पूरे परिवार की जीत थी।

DY पाटिल स्पोर्ट्स एकेडमी में 12 जनवरी 2026 को गौतमी नाइक ने अपना WPL डेब्यू किया। मुकाबला था यूपी वॉरियर्ज के खिलाफ। हालांकि RCB की टॉप ऑर्डर ने इतनी धमाकेदार बैटिंग की कि गौतमी को बैटिंग या बॉलिंग का मौका नहीं मिला। टीम ने 9 विकेट से शानदार जीत दर्ज की। लेकिन अहम बात ये थी कि प्रेमा रावत की जगह प्लेइंग इलेवन में गौतमी को मौका मिला। ये उनके संघर्ष की सफलता की कहानी थी। WPL जैसी बड़ी लीग में डेब्यू करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

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Gautami Naik की कहानी हर उस लड़की के लिए प्रेरणा है जो सपने देखती है। चाहे आप किसी छोटे शहर से हों, चाहे आपके सामने कितनी भी मुश्किलें क्यों न हों अगर आपमें हुनर है और मेहनत करने की चाहत है, तो सफलता जरूर मिलेगी। गौतमी ने साबित किया कि अगर एक रास्ता बंद हो तो दूसरा खोजना चाहिए। महाराष्ट्र से नागालैंड, फिर बड़ौदा और अंत में फिर से महाराष्ट्र ये सफर आसान नहीं था। लेकिन गौतमी ने हर मुश्किल को मौके में बदला।

आज जब गौतमी मैदान पर उतरती हैं, तो वो सिर्फ खुद के लिए नहीं खेल रही हैं। वो उन हजारों लड़कियों के सपनों को पंख दे रही हैं जो गली-मोहल्लों में क्रिकेट खेलती हैं। गौतमी की कहानी बताती है कि अगर दिल में जुनून हो और परिवार का साथ हो, तो कोई भी सपना पूरा हो सकता है।

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