HECI Bill 2025 शिक्षक संघटनों का कडा विरोध, जाने आखिर क्यूँ हो रहा है इस बिल का इतना विरोध

संसद का विंटर सेशन जोरों पर चल रहा है और इस बार एक ऐसा बिल आने वाला है जो देश की पूरी उच्च शिक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख सकता है। हम बात कर रहे हैं हायर एजुकेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (HECI) बिल 2025 की। और इस HECI Bill 2025 बिल का शिक्षक वर्ग से कडा विरोध हो रहा है, उनका कहना है की इस बिल के पास होते ही UGC, NCTE और AICTE जैसी बड़ी संस्थाओं का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। जी हां, आपने सही पढ़ा!

HECI Bill 2025
HECI Bill 2025

HECI Bill क्या है पूरा मामला?

केंद्र सरकार HECI को भारत की हायर एजुकेशन सिस्टम का नया चेहरा बनाना चाहती है। फिलहाल UGC (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन), AICTE (ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन) और NCTE (नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन) मिलकर भारत की उच्च शिक्षा को रेगुलेट करते हैं। लेकिन HECI बिल पास होने के बाद इन तीनों की जगह सिर्फ एक संस्था यानि HECI ले लेगी।

सुनने में तो यह एकीकरण अच्छा लग रहा है, लेकिन शिक्षक संगठन इसे लेकर बहुत ही गंभीर हैं। दिल्ली टीचर्स फेडरेशन (DTF) के पदाधिकारियों ने हाल ही में संसद सदस्यों से मिलकर इस बिल का विरोध किया है। यहां तक कि CPI(M) के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस बिल के बारे में चिट्ठी भी लिख डाली है।

2018 में भी हो चुका है विरोध

DUTA की पूर्व अध्यक्ष और DTF की पदाधिकारी नंदिता नारायण ने इस बिल को लेकर बयान जारी करते हुए कहा है कि HECI Bill 2025 उच्च शिक्षा के लिए खतरे की घंटी है। उनके मुताबिक, यह बिल कोई नया नहीं है बल्कि साल 2018 में लाए गए बिल का संशोधित रूप है।

जून 2018 में जब इसका ड्राफ्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए जारी किया गया था, तब छात्र-शिक्षक संगठनों, सांसदों और दूसरे स्टेकहोल्डर्स ने इसका जमकर विरोध किया था। उस दौरान विरोध इतना तीखा था कि NDA सरकार को इसे कूछ देर के लिए लागू करने से टालना पड़ा था, लेकिन अब सरकार ने फिर से इस बिल को लाया है।

शिक्षक संगठन क्यों कर रहे हैं विरोध?

DTF का कहना है कि HECI विधेयक यूजीसी अधिनियम 1956 को पूरी तरह खत्म कर देगा और इसे बिना किसी स्पष्टीकरण के और चर्चा से जल्दबाजी में पास किया जा रहा है। शिक्षक संगठनों ने इस बारे में कई गंभीर मुद्दे उठाए हैं।

विरोधकों के मुताबीत इस बिल में फंडिंग और रेगुलेशन को अलग किया जाएगा। शिक्षकों को डर है कि फंडिंग और नियमन को अलग करने से विश्वविद्यालयों की आर्थिक स्थिति कमजोर होगी। इस नए संघटन के सदस्यता पर भी विरोघकों का सवाल है। HECI में किस को शामिल किया जाएगा और कैसे? इस पर साफ जानकारी नहीं है। इसके साथ इस बिल के वजह से सिस्टम सेन्ट्रलईज हूगी और सभी शक्तियां एक ही संस्था के हाथ में आने से निर्णय लेने में पारदर्शिता की कमी हो सकती है।

इस HECI Bill में विविधता की कमी है। भारत जैसे विविधता वाले देश में एक केंद्रीकृत संस्था सभी राज्यों की जरूरतों को कैसे समझ पाएगी? विरोधकों को लगता है की विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की ऑटोनॉमी खतरे में पड़ सकती है। साथ ही, संघीय ढांचे के सिद्धांत भी प्रभावित होंगे। शिक्षकों का मानना है कि NEP 2020 ने पहले से ही कई समस्याएं खड़ी की हैं और HECI इन्हें और बढ़ा देगा।

DTF ने हाल ही में एक बैठक की जिसमें शिक्षक और छात्र संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस बैठक में HECI के विरोध में एक कोऑर्डिनेशन कमेटी बनाई गई है। कमेटी की मुख्य मांग है कि HECI बिल 2025 को रिव्यू के लिए Higher Education Standing Committee के पास भेजा जाए। इसी सिलसिले में कमेटी संसद के विभिन्न सदस्यों से मुलाकात कर रही है और अपनी बात रख रही है।

JEE Advanced 2026 exam की तारीख हुई जारी! जानिए परीक्षा की गाइडलाइन हिन्दी में

आगे क्या होगा?

अभी विंटर सेशन चल रहा है और HECI बिल किसी भी दिन संसद में पेश किया जा सकता है। शिक्षक संगठन लगातार अपना विरोध जता रहे हैं और चाहते हैं कि बिल को जल्दबाजी में पास न किया जाए। प्रॉपर रिसर्च और चर्चा के साथ इस अमल में लाया जाना चाहिए।

यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि सरकार इन आपत्तियों को सुनेगी या नहीं। लेकिन एक बात तय है HECI Bill देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाला है। क्या यह बदलाव सकारात्मक होगा या नकारात्मक, यह बहस का विषय बना हुआ है।

आप क्या सोचते हैं? क्या UGC, AICTE और NCTE को एक संस्था में मर्ज करना सही फैसला है? अपने विचार कमेंट में जरूर बताएं!

यह भी पढ़े