MPSC ने किया बड़ा बदलाव, MCQ परीक्षा की उत्तरपत्रिका अब नहीं रहेगी पहले जैसी आसान, 2026 से लागू जाने पूरा मामला
महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) ने अपनी ऑब्जेक्टिव MCQ परीक्षाओं के पैटर्न और उत्तरपत्रिका में कुछ ऐसे बदलाव किए हैं, जो परीक्षार्थी के तैयारी की रणनीति को पूरी तरह से बदल सकते हैं। अगर आप MPSC की किसी भी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है।

MPSC ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि 1 मार्च 2026 के बाद होने वाली सभी MCQ यानी मल्टीपल च्वाइस परीक्षाओं में नई व्यवस्था लागू की जाएगी। यह बदलाव राज्यभर में MPSC द्वारा आयोजित होने वाली हर वस्तुनिष्ठ परीक्षा पर लागू होगा। चाहे वह राज्य सेवा परीक्षा हो, पुलिस भर्ती हो या फिर किसी अन्य विभाग की भर्ती सभी जगह यही नियम चलेंगे। आयोग का कहना है कि इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना, गलतियों को कम करना और मूल्यांकन प्रणाली को और अधिक न्यायपूर्ण बनाना है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर क्या हैं ये बदलाव और इनका आप पर क्या असर पड़ेगा?
पहला बड़ा बदलाव यह है कि अब उत्तरपत्रिका कार्बनलेस दो प्रतियों में आएगी। इसका मतलब है कि जब आप परीक्षा में उत्तर लिखेंगे, तो वह अपने आप दूसरी कॉपी पर भी छप जाएगा। परीक्षा खत्म होने के बाद मूल प्रति तो MPSC के पास जमा हो जाएगी, लेकिन दूसरी प्रति आपको अपने साथ ले जाने की इजाजत होगी। आयोग का यह एक अच्छा कदम है क्योंकि अब आपको पता रहेगा कि आपने किन सवालों के क्या जवाब दिए हैं। जब परीक्षा परिणाम आएगा और आंसर की (Answer Key) जारी होगी, तो आप आसानी से अपने जवाबों का मिलान कर सकेंगे।
उत्तरपत्रिका के दो हिस्से होंगे
मूल उत्तरपत्रिका को दो भागों में बांटा गया है। पहला भाग यानी Part-1 सिर्फ और सिर्फ उत्तर लिखने के लिए होगा। यहां आपको केवल सवालों के जवाब ही भरने होंगे और कुछ नहीं। दूसरा भाग यानी Part-2 में आपको अपनी सारी व्यक्तिगत जानकारी भरनी होगी। इसमें परीक्षा का नाम, आपका बैठक क्रमांक (Sitting Number), प्रश्नपत्र का क्रमांक, विषय कोड और उम्मीदवार तथा निरीक्षक (Invigilator) के हस्ताक्षर शामिल होंगे। परीक्षा खत्म होने के बाद निरीक्षक इन दोनों हिस्सों को अलग कर देंगे।
अब तक जो बैठक क्रमांक 8 अंकों में अल्फान्यूमेरिक (Alphanumeric) हुआ करता था, अब वह बदलकर 7 अंकों का सिर्फ संख्यात्मक (Numeric) हो जाएगा। और सबसे बड़ी बात यह नंबर पूरी चयन प्रक्रिया के दौरान एक ही रहेगा। यानी अगर आपको प्रारंभिक परीक्षा में एक नंबर मिला है, तो वही नंबर मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में भी काम आएगा।
सबसे बड़ा बदलाव – अब सवाल में होंगे पांच विकल्प
अब आती है सबसे महत्वपूर्ण बात, जो की MCQ टाइप परीक्षा के इतिहास में अलग ही प्रयोग है। MPSC ने अब हर सवाल में पांचवां विकल्प जोड़ दिया है। जो की अगर आपको किसी सावल का जवाब नहीं आता या आप जवाब नहीं देना चाहते तो आपको यह पांचवा विकल्प चुनना होगा। पांचवें विकल्प को चुनना अनिवार्य है अगर आप किसी सवाल का जवाब नहीं देना चाहते हैं।
पहले क्या होता था? अगर आपको किसी सवाल का जवाब नहीं आता था, तो आप उसे खाली छोड़ देते थे और कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं होती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं है। फिर भी अगर आपने कोई भी विकल्प नहीं चुना, तो 25% यानी 1/4 अंक काट लिए जाएंगे। आने यहा निगेटिव मार्किंग होगी।
MPSC नेगेटिव मार्किंग के नए नियम
आयोग ने मूल्यांकन प्रणाली में भी कुछ सख्त बदलाव किए हैं। अब बहुत कुछ स्थितियों में आपके 1/4 अंक काटे जाएंगे। इसमें अगर आपने एक से ज्यादा सवाल चुने तो 1/4 अंक की कटौती होगी। अगर आपने पहले एक विकल्प चुना और फिर उसे काटकर दूसरा विकल्प चुना, तो भी 1/4 अंक कैट जाएंगे, गलत जवाब देने पर भी अंक काटे जाएंगे और कोई भी विकल्प नहीं चुना तो भी 1/4 अंक काटे जाएंगे।
MPSC ने यह भी साफ कर दिया है कि कुछ परिस्थितियों में आपकी उत्तरपत्रिका भी पूरी तरह अवैध मानी जा सकती है और आपको जीरो अंक मिलेंगे। इनमे जब आप उत्तरपत्रिका पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे तो तो उत्तरपत्रिक अवैध मणि जाएगी। काले पेन के अलावा कोई और पेन का इस्तमाल करे तो भी अवैध मानी जाएगी। अगर उत्तर पत्रिका पर कोई अजीब निशान, कविता, शेर या कुछ भी असंबंधित लिखा मिला तो भी काटे जाएंगे। प्रश्नपत्रिका का क्रमांक गलत लिखना या क्रमांक ही ना लिखना, QR कोड या टाइमिंग ट्रैक को नुकसान पहुंचाना, पहचान चिन्ह बनाना ऐसे स्थिति में भी उत्तरपत्रिका अवैध मणि जा सकती है।
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MPSC का कहना है कि इन बदलावों का मकसद परीक्षा प्रक्रिया को और बेहतर, पारदर्शी और आधुनिक बनाना है। पुरानी व्यवस्था में कई बार उत्तरपत्रिकाओं में त्रुटियां हो जाती थीं, जिससे मूल्यांकन में दिक्कत आती थी। अब कार्बनलेस कॉपी होने से उम्मीदवारों के पास भी रिकॉर्ड रहेगा और विवाद की गुंजाइश कम होगी। साथ ही, पांचवां विकल्प जोड़ने से यह साफ हो जाएगा कि उम्मीदवार ने सचमुच प्रयास किया है या नहीं। यह व्यवस्था ज्यादा तैयारी वाले और कम तैयारी वाले उम्मीदवारों के बीच अंतर स्पष्ट करने में मदद करेगी।
MPSC के ये नए नियम निश्चित रूप से उम्मीदवारों के लिए एक चुनौती हैं, लेकिन साथ ही यह परीक्षा व्यवस्था को भी ज्यादा पारदर्शी बनाते हैं। जो उम्मीदवार अच्छी तैयारी के साथ जाएंगे, उनके लिए यह फायदेमंद ही साबित होगा। याद रखें, ये नियम 1 मार्च 2026 से लागू होंगे, इसलिए अगर आपकी परीक्षा इस तारीख के बाद है तो इन बदलावों को अच्छी तरह समझ लें। तैयारी में लापरवाही न करें और खासकर उत्तरपत्रिका भरते समय बहुत सावधान रहें।

