O Romeo Review : शाहिद कपूर की ‘O Romeo’ का धमाका! विशाल भारद्वाज ने फिर दिखाया जादू, लेकिन…
विशाल भारद्वाज और शाहिद कपूर की जोड़ी एक बार फिर सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। ‘कमीने’ और ‘हैदर’ के बाद अब दोनों ‘O Romeo’ लेकर आए हैं और इस बार भी यह जोड़ी ने सिनेप्रेमियों को निराश नहीं किया है। लेकिन क्या यह फिल्म सच में उतनी धमाकेदार है जितना नाम सुनकर लगता है? आइए जानते हैं विस्तार से।

कहानी में है इश्क, बदला और खून का तड़का
O Romeo फिल्म की शुरुआत ही धमाकेदार है। पहले सीन में ‘धक धक करने लगा’ गाने की बीट पर उस्तरा यानी शाहिद कपूर की एंट्री होती है और दर्शकों को समझ आ जाता है कि यह कोई साधारण फिल्म नहीं है। उस्तरा एक खतरनाक सुपारी किलर है जो अपना काम बेहद सफाई से करता है। वह उस्तरे से जितनी कुशलता से अपने टारगेट को खत्म करता है, उतनी ही खूबसूरती से डांस भी करता है।
लेकिन उस्तरा की असली ताकत है नाना पाटेकर का किरदार खान साहब। ये इंटेलिजेंस ब्यूरो के पुलिस अधिकारी हैं जो उस्तरे को अपने हिसाब से इस्तेमाल करते हैं। खान साहब चाहते हैं तो उस्तरा किसी भी गैंगस्टर का सफाया कर देता है।
लेकिन फिर कहानी में मोड़ आता है जब उस्तरा की जिंदगी में दाखिल होती है अफशां (तृप्ति डिमरी)। अफशां कोई साधारण लड़की नहीं है उसके दिल में बदले की आग धधक रही है। वह उस्तरा के पास जलाल नाम के खूंखार गैंगस्टर और उसके तीन साथियों को मारने की सुपारी लेकर आती है। लेकिन धीरे-धीरे उस्तरा और अफशां के बीच इश्क की शुरुआत हो जाती है।
अब सवाल यह है कि अफशां को जलाल से इतनी दुश्मनी क्यों है? और प्यार में पड़कर उस्तरा कहां तक जा सकता है? इन सब सवालों के जवाब के लिए आपको फिल्म देखनी ही होगी।
हुसैन जैदी की किताब से निकली है कहानी
‘O Romeo’ की कहानी मशहूर लेखक हुसैन जैदी की किताब ‘माफिया क्वींस ऑफ मुंबई’ से प्रेरित है। विशाल भारद्वाज ने इस कहानी को पर्दे पर उतारते हुए इश्क और बदले का एक शानदार मिश्रण पेश किया है। चूंकि यह गैंगस्टर्स की दुनिया की कहानी है, तो स्वाभाविक है कि इसमें अंधेरा, हिंसा और खून-खराबा होगा। कई दृश्यों में भारीपन भी महसूस होता है।
लेकिन विशाल भारद्वाज की खासियत यही है कि वे इस अंधेरे में भी मोहब्बत, दोस्ती और अपनेपन की रोशनी भर देते हैं। नब्बे के दशक के मशहूर गाने जैसे ‘धीरे धीरे से मेरी जिंदगी में आना’ और ‘ऐ मेरे हमसफर’ बीच-बीच में दिल को सुकून देते हैं।
विशाल भारद्वाज सिर्फ बेहतरीन डायरेक्टर ही नहीं, बल्कि शानदार म्यूजिक डायरेक्टर भी हैं। ‘O Romeo’ में उनका संगीत कमाल का है। ‘आशिकों की कॉलोनी’, ‘इश्क का फीवर’ और ‘नीचे पान की दुकान’ जैसे गाने दिल को छू जाते हैं। और जब इन गानों में गुलजार साहब के लिखे बोल मिल जाएं तो फिर कहना ही क्या!
O Romeo cast
शाहिद कपूर ने उस्तरा के किरदार में अपने करियर की बेहतरीन परफॉर्मेंस में से एक दी है। उनके किरदार में अजीबोगरीब अंदाज है, खौफ है, दर्द है, इश्क है सबकुछ है। शाहिद ने इस मौके को दोनों हाथों से भुनाया है।
तृप्ति डिमरी भी कमाल की हैं। अफशां के किरदार में उन्होंने मासूमियत भी दिखाई है और गुस्सा भी। अपराधबोध और जिद, हर भाव को उन्होंने बखूबी निभाया है। नाना पाटेकर जब भी स्क्रीन पर आते हैं, पूरी फिल्म पर छा जाते हैं। O Romeo के कई दृश्यों में तो वे शाहिद पर भी भारी पड़ते हैं। अविनाश तिवारी ने जलाल का किरदार अच्छे से निभाया है, लेकिन उनके किरदार को उतनी गहराई नहीं मिली जितनी मिलनी चाहिए थी।
राहुल देशपांडे (इंस्पेक्टर पठारे) और हुसैन दलाल (उस्तरा के दोस्त) का काम भी सराहनीय है। दिशा पाटनी, तमन्ना भाटिया, अरुणा ईरानी, विक्रांत मैसी और फरीदा जलाल के छोटे-छोटे रोल फिल्म में चार चांद लगा देते हैं।
सिनेमैटोग्राफर बेन बर्नहार्ड ने मुंबई की गलियों से लेकर स्पेन के बुल फाइट सीन तक सबकुछ बेहद खूबसूरती से कैद किया है। एक्शन डायरेक्टर डेनी डेल रसारियो ने एक्शन सीन्स को भी बहुत अच्छे से कोरियोग्राफ किया है।
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इस O Romeo फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी है इसका लंबा रनटाइम। करीब तीन घंटे (2 घंटे 57 मिनट) की यह फिल्म बीच-बीच में दर्शकों के धैर्य की परीक्षा लेती है। एडिटर आरिफ शेख अगर इसे कम से कम 20 मिनट और काट देते तो फिल्म और भी असरदार हो जाती।
अगर आप विशाल भारद्वाज के सिनेमा के फैन हैं और शाहिद कपूर की दमदार एक्टिंग देखना चाहते हैं, तो ‘O Romeo’ आपके लिए है। हालांकि लंबा रनटाइम थोड़ी परेशानी जरूर देगा, लेकिन फिल्म का संगीत, एक्टिंग और कहानी आपको बांधे रखेंगे। यह फिल्म उन दर्शकों के लिए है जो मसाला एंटरटेनमेंट से हटकर कुछ अलग और गहरा देखना चाहते हैं। विशाल भारद्वाज ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे अपने किरदारों में से वह सबकुछ निकाल लेते हैं जो दूसरों को नजर नहीं आता। ‘कमीने’ और ‘हैदर’ के बाद ‘O Romeo’ भी शाहिद-विशाल की तिकड़ी का एक यादगार प्रोडक्ट है।

