समग्र शिक्षा 3.0 नए वर्जन में, क्या सच में बदलेगा देश का भविष्य? 2047 तक विकसित भारत का रोडमैप
देश की शिक्षा व्यवस्था में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली में समग्र शिक्षा 3.0 को लेकर एक अहम बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें देश के स्कूली शिक्षा के भविष्य को लेकर बड़े फैसले लिए गए। सुषमा स्वराज भवन, प्रवासी भारतीय केंद्र में हुई इस पूरे दिन चली बैठक का मकसद था समग्र शिक्षा के नए वर्जन के लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार करना।

क्या है समग्र शिक्षा 3.0?
समग्र शिक्षा असल में स्कूली शिक्षा के लिए केंद्र सरकार की एक बड़ी योजना है। इसकी खासियत यह है कि यह प्री-प्राइमरी से लेकर सीनियर सेकेंडरी तक की पूरी शिक्षा को एक साथ देखती है। यानी छोटे बच्चों से लेकर 12वीं क्लास तक के बच्चों की शिक्षा की हर जरूरत का ख्याल रखना इस योजना का मकसद है। अब इसका तीसरा वर्जन आने वाला है, जो और भी ज्यादा प्रभावी होगा।
2047 तक विकसित भारत का विजन
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस मौके पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का जो सपना देखा है, वह तभी पूरा होगा जब देश का हर बच्चा क्वालिटी एजुकेशन पा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि 12वीं क्लास तक 100 फीसदी एनरोलमेंट हासिल करना बेहद जरूरी है।
मंत्री जी ने यह भी कहा कि पढ़ाई में आ रही कमियों को दूर करना, स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या घटाना, पोषण और सीखने के नतीजों में सुधार लाना, टीचर्स की क्षमता बढ़ाना और अमृत पीढ़ी को मैकाले की सोच से आगे ले जाना ये सब हमारी साझा जिम्मेदारियां हैं। इन्हें पूरा करके ही हम मजबूत मानव पूंजी तैयार कर सकते हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने साफ किया कि नई समग्र शिक्षा योजना सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेगी। यह नतीजों पर फोकस करने वाली, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, भारतीयता में जड़ें जमाए हुए और बच्चों की अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से काम करने वाली होगी। उन्होंने कहा कि बच्चों का समग्र विकास करने और टेक्नोलॉजी को सार्थक तरीके से जोड़ने के लिए एक बार फिर स्कूलों को समाज के हवाले करना जरूरी है।
NEP 2020 के 5 साल बाद नया दौर
शिक्षा मंत्री ने बताया कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 को लागू हुए पांच साल हो चुके हैं और अब हम शैक्षिक सुधार के एक नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं। यह दौर राष्ट्रीय विकास के लक्ष्यों के साथ पूरी तरह तालमेल बिठाकर चलेगा। उन्होंने सभी हितधारकों से अपील की कि वे मिलकर 2026-27 के शैक्षणिक सत्र के लिए एक मजबूत और व्यापक वार्षिक योजना तैयार करें और इसे एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाएं।
इस अहम बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कौशल विकास और उद्यमिता तथा शिक्षा मंत्री जयंत चौधरी भी शामिल हुए। इसके अलावा स्कूल शिक्षा और साक्षरता सचिव संजय कुमार, उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी, मंत्रालय के अतिरिक्त और संयुक्त सचिव, 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य शिक्षा सचिव और राज्य परियोजना निदेशक, विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधि और शिक्षा क्षेत्र के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ मौजूद रहे।
“हमें स्कूलों को समाज को लौटाना होगा”
— Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) January 9, 2026
'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' के क्रियान्वयन के पाँच वर्षों के उपरांत, वर्ष 2026-27 में हम 'समग्र शिक्षा' के एक नए प्रारूप की ओर बढ़ रहे हैं। आज हमारे सामने 'विकसित भारत' के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था और मानव बल तैयार करना सबसे बड़ी चुनौती है।… pic.twitter.com/IMby81to2S
जयंत चौधरी ने कहा कि वे योजनाएं सबसे ज्यादा कामयाब होती हैं जो बॉटम-अप अप्रोच से बनाई जाती हैं और जो स्कूलों और राज्यों की असली परिस्थितियों को समझती हैं। उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा 3.0 इसी भावना को दर्शाती है और यह नेशनल एजुकेशन पॉलिसी की व्यावहारिक अभिव्यक्ति है, जहां स्कूल बदलाव के एजेंट के रूप में काम करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि स्किलिंग, व्यावसायिक रास्ते, डिजिटल लर्निंग और समावेशन को मल्टीडिसिप्लिनरी शिक्षा ढांचे में शामिल करके समग्र शिक्षा सिर्फ सुधार से आगे जाकर बच्चों को काम, जीवन और तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के लिए तैयार कर रही है।
देश के भविष्य की तैयारी
यह बैठक इस बात का संकेत है कि सरकार देश की शिक्षा व्यवस्था को बदलने के लिए गंभीर है। 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों, शिक्षा विशेषज्ञों और विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से यह साफ होता है कि यह एक सामूहिक प्रयास है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सभी प्रतिभागियों के उत्साहपूर्ण योगदान और मूल्यवान सुझावों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस फोरम पर साझा किए गए सहयोगात्मक विचार-विमर्श और नए विचार स्कूली शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने और समग्र शिक्षा की फिर से कल्पना करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने में मदद करेंगे।
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समग्र शिक्षा 3.0 सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह देश के भविष्य को संवारने की एक कोशिश है। जब हर बच्चे को क्वालिटी एजुकेशन मिलेगी, जब स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या कम होगी, जब टीचर्स की क्षमता बढ़ेगी और जब शिक्षा भारतीय मूल्यों से जुड़ी होगी, तभी 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार हो सकेगा।
यह पहल दिखाती है कि सरकार सिर्फ नीतियां बनाने में ही नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने में भी गंभीर है। अब देखना यह होगा कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इसे कैसे लागू करते हैं और देश के करोड़ों बच्चों की जिंदगी में क्या बदलाव आता है।

